थीम स्टेट यूपी से आए पद्मश्री शिल्पकार ब्रास कला को पहुंचा रहे देश-विदेश तक
-स्टॉल नंबर 1184 पर पर्यटकों की पसंद के अनुसार तैयार किए जा रहे ब्रास से बने उत्पाद
फरीदाबाद, 06 फरवरी।
विश्व विख्यात अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेला भारतीय पारंपरिक कला, शिल्प और संस्कृति को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करने वाला एक प्रमुख आयोजन बन चुका है। इस भव्य मेले में देश-विदेश से आए शिल्पकार अपनी अनूठी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। थीम स्टेट उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से आए पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित शिल्पकार चिरंजी लाल यादव स्टॉल नंबर 1184 पर अपनी उत्कृष्ट ब्रास (पीतल) शिल्प कला का प्रदर्शन कर रहे हैं।
यूपी के शिल्पकार पद्म श्री चिरंजी लाल यादव पिछले 22 वर्षों से लगातार सूरजकुंड मेले में भाग ले रहे हैं और इस मंच के माध्यम से मुरादाबाद की प्रसिद्ध पीतल कला को देश-विदेश तक पहुंचा रहे हैं। मुरादाबाद ब्रास उद्योग भारत में धातु शिल्प के लिए ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध है और वे इसी परंपरा को जीवित रखते हुए आधुनिक डिजाइन के साथ पारंपरिक कारीगरी को आगे बढ़ा रहे हैं। इस वर्ष स्टॉल पर पीतल से बने अनेक आकर्षक और उपयोगी उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं, जिनमें ब्रास की बास्केट, ट्रे, शिप (जहाज) शोपीस, चकला-बेलन, चाय ट्रे, फ्लावर वास, फ्रूट बाउल, सजावटी घंटियां, बांसुरी, पूजा सामग्री, घरेलू सजावट के आइटम और विभिन्न प्रकार के पारंपरिक व आधुनिक पीतल के बर्तन शामिल हैं। इन उत्पादों की बेहतरीन फिनिशिंग, मजबूती और बारीक नक्काशी दर्शकों और खरीदारों को विशेष रूप से आकर्षित कर रही है।
पद्मश्री शिल्पकार चिरंजी लाल यादव ने कहा कि सूरजकुंड मेला उनके लिए केवल एक व्यापारिक अवसर नहीं, बल्कि अपनी पारंपरिक कला और शिल्प विरासत को संजोने और आगे बढ़ाने का एक गौरवपूर्ण माध्यम है। वे पीतल के बर्तनों और सजावटी वस्तुओं पर ग्राहकों की मांग के अनुसार किसी भी प्रकार की विशेष नक्काशी, नाम, धार्मिक चिन्ह, प्रतीक, पारंपरिक डिजाइन या आधुनिक पैटर्न तैयार कर सकते हैं। यह कस्टमाइजेशन सुविधा उनके स्टॉल की एक विशेष पहचान बन चुकी है, जिससे हर उत्पाद एक विशिष्ट और व्यक्तिगत कलाकृति के रूप में तैयार होता है। पर्यटक इन उत्पादों को खरीद कर भी ले जा रहे हैं।