मेदांता-मेडिसिटी में न्यूरोसर्जन डॉ. सुधीर दुबे एवं डॉ. जॉन के शुस्टर ने स्पाइनल ट्रीटमेंट के मामलों, प्रबंधन और नयी तकनीकों पर चर्चा की

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Gurugram News, 27 Feb 2019 : आंकड़े बताते हैं कि भारत में 16 से 34 साल की उम्र में ही लम्बर स्पाइन में तकलीफ के मामले बढ़ रहे हैं। समय के साथ, यह कई जटिलताओं को जन्म दे सकती है। हालांकि इस तरह के रीढ़ विकारों के इलाज के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं, जिनमें ऑब्लीक लेटरल इंटरबॉडी फ्यूजन तकनीक (ओलिफ) काफीं लोकप्रिय हो रही है, क्योंकि यह रीढ़ की हड्डी की 80 प्रतिशत समस्याओं को ठीक कर सकती है। इसके पीछे कुछ कारणों में कम मृत्यु-दर, ऑपरेशन के बाद कम दर्द, शल्य क्रिया में कम समय लगना और अस्पताल में कम समय के लिए रहना प्रमुख हैं।

अधिकांशत: पीठ और पैर का दर्द लम्बर स्पाइऩ से शुरू होता है, जिस पर सबसे अधिक दबाव रहता है। यहां लम्बर स्पाइन से तात्पर्य है पीठ का निचला हिस्सा, जहां रीढ़ की हड्डी पेट की ओर को कर्व लिए होती है। यह कंधों के छह इंच नीचे से शुरू होती है, और टॉप पर थोरेसिक स्पाइन से जुड़ती है तथा नीचे सेक्रल स्पाइन तक जाती है।

इस बारे में बोलते हुए, मेदांता द मेडिसिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज के डायरेक्टर डॉ. सुधीर दुबे ने कहा, रीढ़ की हड्डी खराब होने संबंधी विकारों की संख्या में वृद्धि को देखते हुए, ओलिफ जैसी कम चीरफाड़ वाली तकनीकों के बारे में जागरूकता उत्पन्न करने की जरूरत है। यह अन्य तकनीकों की तुलना में बेहतर स्वास्थ्य परिणाम देती है। तकनीक निचले स्तरों में दोनों तरफ रीढ़ के आसपास की पेसो मांसपेशी को बचाती है। इसके चलते नसों को नुकसान की संभावना सीमित हो जाती है, जिससे पैर में दर्द, जांघ में कमजोरी और सुन्न होने का खतरा घट जाता है। देश में अधिकांश रोगी रीढ़ की हड्डी की बीमारियों की अनदेखी करते हैं और ओलिफ इन्हें ठीक करने में एक वरदान साबित हो सकती है। मैं डॉ. जॉन के शुस्टर का आभारी हूं कि वे रीढ़ की हड्डी के विकारों के इलाज में अपने अनुभव और दुनिया की सर्वोत्तम तकनीकों के बारे में बताने के लिए आज हमारे बीच हैं।

ओलिफ प्रोसीजर सर्जन को एक तिरछी साइड की तरफ से लम्बर स्पाइन का इलाज करने की सहूलियत देती है। रीढ़ की हड्डी का यह फ्यूजन प्रोसीजर उन्हें ठीक वैसे परिणाम देता है, जैसे कि रीढ़ की पारंपरिक सर्जरी में मिलते हैं, जबकि इसमें चीरफाड़ भी कम से कम करनी होती है। रीढ़ के खुले पारंपरिक प्रोसीजरं की तुलना में यह सुरक्षित भी है, क्योंकि पारंपरिक तरीके में बड़े चीरों की आवश्यकता होती है, जिससे रक्त की बहुत हानि होती है, अस्पताल में अधिक दिन रहना पड़ता है, रिकवरी में लंबा समय लगता है और ऑपरेशन के बाद दर्द भी अधिक होता है। पारंपरिक तरीके में मांसपेशियों को काटना पड़ता है, जिससे तंत्रिका कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है।

वाशिंगटन, यूएसए के ऑर्थोपीडिक स्पाइन सर्जन, डॉ. जॉन के शुस्टर (एमडी) ने कहा, “मिनिमली इनवेसिव सर्जरी रीढ़ की हड्डी संबंधी विकारों को ठीक करने की दिशा में एक उभरता हुआ ट्रेंड है और पारंपरिक सर्जरी करने के लिए नये तरीके से छोटे चीरों का उपयोग करती है। ओलिफ एक ऐसी सर्जरी है जो कई रूपों में बहुत अधिक फायदेमंद है। यह आंतों (पेरिटोनियम) के पीछे से होने के कारण, प्रमुख रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचने से बचाती है, रीढ़ की हड्डी के आसपास स्थित पेसो मांसपेशी में स्थित नसों के लिए संभावित जोखिम को कम करती है, और इंटरबॉडी फुटप्रिंट अधिक डिग्री में करेक्शन के विकल्प देते हैं, जिससे रीढ़ की हड्डी के फ्यूजन को अधिक जगह मिल पाती है। मैं मेदांता में पूरी टीम को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने आज मुझे स्पाइनल बीमारियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद की और ओलिफ तकनीक का उपयोग करके स्पाइनल सर्जरी का लाइव प्रदर्शन भी किया।”

सामान्य एनिस्थीसिया के तहत की जाने वाली इस सर्जरी में, मरीज को दायीं करवट से लिटाया जाता है, ताकि सर्जरी के लिए उसकी बांयीं साइड ऊपर रहे। एक बार जब त्वचा को साफ कर लिया जाता है और स्टेराइल ड्रेप्स लगा दिए जाते हैं, तब एक छोटा चीरा रीढ़ की हड्डी के स्तर पर लगाया जाता है। कई स्तरों के लिए, त्वचा पर एक लम्बा चीरा लगाया जाता है। पेट के अंगों को एक ओर को करने के बाद, रक्त वाहिकाओं को सुरक्षित रूप से बचा लिया जाता है, और रीढ़ की हड्डी को एक्सपोज किया जाता है। पेसो मांसपेशी को धीरे से हटा दिया जाता है और एक न्यूनतम इनवेसिव स्पाइनल रीट्रैक्टर रखा जाता है। इसके बाद डिस्क को हटा दिया जाता है और रीढ़ की हड्डी (कशेरुक) के सिरों को रीढ़ की हड्डी के फ्यूजन के लिए तैयार किया जाता है।

ओलिफ उपचार योजनाएं और परिणाम हर रोगी के लिए अलग होते हैं और अलग-अलग रोगियों में भिन्न नतीजे मिल सकते हैं। हालांकि, इसके फायदे में यह तथ्य शामिल है कि इंटरबॉडी का एक बड़ा आकार रखा जा सकता है जो मानव रीढ़ की प्राकृतिक लॉर्डोसिस और प्रारंभिक फ्यूजन के लिए सतह को बढ़ाने में मदद करता है। रोगी जल्दी ही अपनी सामान्य जिंदगी शुरू कर सकता हैैं, सर्जरी के बाद कम दर्द होता है, मांसपेशियों में जख्म या तंत्रिका क्षति लंबे समय तक नहीं रहती है। कुल मिलाकर दर्द मुक्त परिणाम मिलते हैं।

संकेतों, चेतावनियों, सावधानियों, प्रतिकूल घटनाओं, क्लिनिकल नतीजों और अन्य महत्वपूर्ण चिकित्सा सूचनाओं की पूरी सूची के लिए चिकित्सक से परामर्श करना अनिवार्य है। जनसंख्या में वृद्धि के साथ, रीढ़ की सुरक्षित सर्जरी की मांग बढ़ेगी, ताकि जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो, और ओलिफ इसे पाने में मदद कर सकती है।

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