क्लिरनेट ने स्वास्थ्य सेवा के भविष्य को दिशा देने के लिए वैश्विक महिला चिकित्सा नेताओं को एक मंच पर किया एकजुट


8 देशों की 9 अग्रणी महिला चिकित्सकों की साझा अपील: नेतृत्व की राह में महिलाओं की भागीदारी लगातार कम हो रही है, इसे रोकने में डिजिटल प्लेटफॉर्म निभा सकते हैं महत्वपूर्ण भूमिका


मुंबई, 15 जून 2026: भारत के अग्रणी फिजिशियन इंटेलिजेंस और एंगेजमेंट प्लेटफॉर्म क्लिरनेट ने "विज्ञान में महिलाएं: उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व की दिशा में " शीर्षक से एक विशेष वैश्विक सत्र का आयोजन किया। इस सत्र में अफ्रीका, एशिया, मध्य-पूर्व और यूरोप के विभिन्न देशों से नौ प्रतिष्ठित महिला चिकित्सकों और स्वास्थ्य सेवा नेताओं ने भाग लिया। सभी वक्ताओं ने एक साझा चिंता व्यक्त की कि विश्वभर में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में महिलाओं की संख्या अधिक होने के बावजूद नेतृत्वकारी पदों पर उनकी भागीदारी अभी भी बेहद सीमित है।

क्लिरनेट द्वारा आयोजित और संचालित यह विशेष सत्र कंपनी के वैश्विक विचार नेतृत्व (विचार नेतृत्व  की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से क्लिरनेट ने स्वयं को केवल एक क्लिनिकल नॉलेज प्लेटफॉर्म तक सीमित न रखते हुए चिकित्सा क्षेत्र में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने वाले एक सक्रिय मंच के रूप में स्थापित किया है।

नाइजीरिया, कैमरून, जिम्बाब्वे, केन्या, सऊदी अरब, भारत और फ्रांस से शामिल वक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र महिलाओं को बड़ी संख्या में प्रशिक्षित तो करता है, लेकिन नेतृत्व की यात्रा में वे धीरे-धीरे पीछे छूट जाती हैं। नाइजीरिया की मेडिकल वीमेंस एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. ज़ैनब क्वारू मुहम्मद-इदरीस ने इसे "लीकिंग पाइपलाइन" की संज्ञा दी। संरचनात्मक पक्षपात, सामाजिक मान्यताएं, पदोन्नति में अदृश्य बाधाएं और मेंटरशिप की कमी को इस स्थिति के प्रमुख कारणों के रूप में चिन्हित किया गया।

इस सत्र की विशेषता केवल वक्ताओं की उपस्थिति नहीं थी, बल्कि उनकी वह सामूहिक मांग थी जिसमें क्लिरनेट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म को महिलाओं के पेशेवर विकास के लिए एक महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना (Infrastructure) के रूप में देखा गया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे प्लेटफॉर्म केवल क्लिनिकल शिक्षा तक सीमित न रहकर अवसरों का विस्तार करने, दृश्यता बढ़ाने और समानता को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

सत्र की प्रमुख आवाज़ें
डॉ. अमानी असफोर

अध्यक्ष, मेडिकल वीमेंस इंटरनेशनल एसोसिएशन (MWIA)
उन्होंने महिलाओं को स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में योगदानकर्ता से नेतृत्वकर्ता बनाने के लिए अपनी प्रसिद्ध "Triad of Empowerment" अवधारणा प्रस्तुत की, जिसमें व्यक्तिगत सशक्तिकरण, नीतिगत वकालत और रणनीतिक साझेदारियों को परिवर्तन के तीन प्रमुख स्तंभ बताया गया। उन्होंने डिजिटल स्वास्थ्य, नैतिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और एकीकृत देखभाल मॉडल को इस परिवर्तन का आधार बताया।

डॉ. जूली बाक

चेयरपर्सन, एसोसिएट मेंबर्स, वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन (WMA)
उन्होंने बताया कि चिकित्सा क्षेत्र में युवा महिलाओं को नेतृत्व की दिशा में बढ़ते समय एक साथ आयु और लैंगिक पक्षपात दोनों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मेडिकल संस्थानों और वरिष्ठ नेताओं से औपचारिक मेंटरशिप और स्पॉन्सरशिप कार्यक्रमों को संस्थागत रूप देने की अपील की।

डॉ. रूआ अल हारिथी

सऊदी सोसाइटी ऑफ डर्मेटोलॉजी एंड डर्मेटोलॉजिक सर्जरी
उन्होंने सऊदी अरब के विज़न 2030 का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार नीतिगत सुधार, सामाजिक बदलाव और संस्थागत प्रतिबद्धता महिलाओं की नेतृत्वकारी भागीदारी को तेजी से बढ़ा सकते हैं। उन्होंने डिजिटल सहयोग नेटवर्क को अगली पीढ़ी की महिला नेताओं के लिए महत्वपूर्ण साधन बताया।

डॉ. मोनिका कौशल

सचिव, एमिरेट्स पीडियाट्रिक एंड नियोनेटल सोसाइटी
उन्होंने इस विरोधाभास की ओर ध्यान आकर्षित किया कि स्वास्थ्य सेवा कार्यबल में महिलाओं की मजबूत उपस्थिति के बावजूद नेतृत्वकारी भूमिकाओं में उनकी दृश्यता बेहद कम है। उन्होंने पारदर्शी पदोन्नति प्रक्रियाओं, लचीली कार्य नीतियों और नेतृत्व प्रशिक्षण को आवश्यक समाधान बताया।

डॉ. मंदाकिनी मेघ

प्रेसिडेंट-इलेक्ट, भारत, MWIA
उन्होंने कहा कि कई प्रगतिशील स्वास्थ्य प्रणालियां भी लैंगिक समानता से जुड़ी नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रही हैं। उन्होंने पारदर्शी वेतन संरचना, लैंगिक अंतराल के आंकड़ों की निगरानी, समर्पित वित्तीय सहायता और नेतृत्व की जवाबदेही को अनिवार्य बताया।

डॉ. ज़ैनब क्वारू मुहम्मद-इदरीस

अध्यक्ष, मेडिकल वीमेंस एसोसिएशन ऑफ नाइजीरिया (MWAN)
उन्होंने नेतृत्व की राह में महिलाओं के पीछे छूटने के लिए संरचनात्मक पक्षपात, सामाजिक मानदंडों, मेंटरशिप की कमी और कार्य-जीवन संतुलन की चुनौतियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने महिलाओं की नेतृत्वकारी भूमिकाओं को सामान्य बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. माफोरकोह नचुंगोंग एप्से नेबा-न्जोफोर

अध्यक्ष, कैमरून मेडिकल वीमेंस एसोसिएशन
उन्होंने स्वयंसेवी चिकित्सक से राष्ट्रीय संगठन की अध्यक्ष बनने तक की अपनी यात्रा साझा करते हुए कहा कि पहचान और सम्मान मांगने से नहीं, बल्कि निरंतर प्रभावशाली कार्यों से प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म महिलाओं के योगदान को व्यापक पहचान दिला सकते हैं।

डॉ. वर्जीनिया मसुंडा

अध्यक्ष, मेडिकल वीमेंस एसोसिएशन ऑफ जिम्बाब्वे (MWAZim)
उन्होंने बताया कि टेलीमेडिसिन, रिमोट कंसल्टेशन और वर्चुअल केयर जैसे डिजिटल स्वास्थ्य उपकरण महिला चिकित्सकों को पेशेवर और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में समान डिजिटल पहुंच और लैंगिक-संवेदनशील प्रशिक्षण को आवश्यक बताया।

डॉ. क्रिस्टीन सादिया

अध्यक्ष, केन्या मेडिकल वीमेंस एसोसिएशन (KMWA)
उन्होंने पेशेवर संगठनों को समाधान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि उन्हें मेंटरशिप, नीति वकालत, शोध सहयोग और संस्थागत समर्थन प्रदान करना चाहिए ताकि महिलाएं नेतृत्व के मार्ग में मौजूद अदृश्य बाधाओं को पार कर सकें।
लतिका सिन्हा

एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट, क्लिरनेट 

उन्होंने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में महिलाओं के उद्यमी, नवप्रवर्तक और इकोसिस्टम निर्माता के रूप में उभरने पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि क्लिरनेट केवल ज्ञान साझा करने वाला मंच नहीं, बल्कि भविष्य के चिकित्सक नेताओं के लिए एक लॉन्चपैड बनने के लिए प्रतिबद्ध है।

क्लिरनेट की भूमिका: जहां ज्ञान और वकालत का होता है संगम

4 लाख से अधिक सत्यापित चिकित्सकों के साथ क्लिरनेट केवल एक कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (CME) प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य सेवा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद का एक सशक्त मंच भी है। यह विशेष सत्र इस बात का प्रमाण है कि कैसे साक्ष्य-आधारित चिकित्सा शिक्षा को स्वास्थ्य पेशेवरों के वास्तविक अनुभवों के साथ जोड़ा जा सकता है।

सत्र में कई वक्ताओं ने विशेष रूप से डिजिटल प्लेटफॉर्म और सहयोगी नेटवर्क को उन बाधाओं को दूर करने का प्रभावी माध्यम बताया, जिन्हें भौगोलिक सीमाएं और संस्थागत संरचनाएं लंबे समय से बनाए हुए हैं। आठ देशों के नेताओं को एक ही मंच पर लाना क्लिरनेट की इसी क्षमता का उदाहरण है।

लतिका सिन्हा, एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट, क्लिरनेट ने कहा, "क्लिरनेट  में हमारा मानना है कि स्वास्थ्य सेवा का भविष्य उन महिलाओं का भी है, जिन्होंने हमेशा इसकी मजबूत नींव तैयार की है। यह सत्र हमारी उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है जिसके माध्यम से हम ऐसे नेटवर्क, अवसर, दृश्यता और मेंटरशिप तैयार कर रहे हैं जो प्रतिभाशाली चिकित्सकों को मान्यता प्राप्त नेताओं में बदल सकें।"

सत्र से उभरकर सामने आए प्रमुख निष्कर्ष

लीकिंग पाइपलाइन: चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी संख्या में प्रवेश करने के बावजूद महिलाएं नेतृत्व के मार्ग में संरचनात्मक बाधाओं के कारण पीछे छूट जाती हैं।

समानता का माध्यम बन सकता है डिजिटल स्वास्थ्य: टेलीमेडिसिन और डिजिटल प्लेटफॉर्म महिलाओं की पेशेवर पहुंच को बढ़ा सकते हैं।

नीतियों को इरादों से आगे बढ़ना होगा: पारदर्शी पदोन्नति, वेतन समानता और जवाबदेही अब अनिवार्य आवश्यकताएं हैं।

ट्रायड ऑफ एम्पावरमेंट: व्यक्तिगत विकास, नीतिगत वकालत और संस्थागत साझेदारियां स्थायी बदलाव का आधार हैं।

मेंटोरशिप से आगे स्पॉन्सरशिप: वरिष्ठ नेताओं को सक्रिय रूप से अवसर उपलब्ध कराने और महिलाओं के लिए वकालत करने की आवश्यकता है।

वैश्विक सोच, स्थानीय समाधान: विभिन्न देशों के अनुभव बताते हैं कि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप रणनीतियां और वैश्विक सहयोग मिलकर प्रभावी परिणाम दे सकते हैं।