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अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने को प्रशासन सख्त, एडीसी ने दिए निर्देश
- बाल विवाह मुक्त समाज के लिए अधिकारियों ने ली शपथ
फरीदाबाद, 13 अप्रैल।
आगामी 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर होने वाले विवाह आयोजनों की आड़ में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा को रोकने के लिए जिला प्रशासन प्रतिबद्ध है। अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) अंजलि श्रोत्रिया ने आज इस संबंध में संबंधित अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक के दौरान एडीसी ने स्पष्ट किया कि अक्षय तृतीया का दिन धार्मिक रूप से अत्यंत शुभ माना जाता है, जिसके चलते बड़ी संख्या में शादियाँ आयोजित होती हैं, किंतु इसी की ओट में मासूम बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर कानून का उल्लंघन किया जाता है।
बैठक में एडीसी अंजलि श्रोत्रिया ने महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, जिला बाल संरक्षण इकाई, रेड क्रॉस तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों को संयुक्त रूप से समाज में बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अक्षय तृतीया जैसे अवसरों पर बाल विवाह की घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में सभी संबंधित विभागों को विशेष सतर्कता बरतने और आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय निगरानी रखें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करें।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्कूलों, गांवों और शहरी क्षेत्रों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि आमजन को बाल विवाह के दुष्परिणामों से अवगत कराया जा सके और उन्हें इस कुप्रथा के खिलाफ प्रेरित किया जा सके।
बैठक के दौरान उपस्थित सभी अधिकारियों ने शपथ ली कि वे अपने परिवार, पड़ोस और समाज में किसी भी बालिका का बाल विवाह नहीं होने देंगे और बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
बैठक में जिला कल्याण अधिकारी ममता शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी अंशु सिंगला, सीडीपीओ मिनाक्षी चौधरी, रेड क्रॉस सचिव बिजेंद्र सौरोत, जिला बाल संरक्षण अधिकारी हेमा चौधरी सहित अन्य सभी संबंधित विभागों के अधिकारीगण मौजूद रहे।