कनेक्टिविटी में नया आविष्‍कार: हैप्‍पी पैरेंट्स लैब ने पुणे के कैट्स लर्निंग सेंटर में नेक्‍स्‍ट-जेन इंटरनेट फि‍ल्‍टरिंग सिस्‍टम ‘हैप्‍पीनेट्ज़ बॉक्‍स’ पेश किया

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भारत, … August, 2023: अभिनव समाधानों की अग्रणी प्रदाता हैप्‍पी पैरेंट्स लैब ने पुणे में पढ़ाई और बच्‍चों की देखभाल करने वाले एक स्‍थान, कैट्स लर्निंग सेंटर में अपने महत्‍वपूर्ण इंटरनेट फिल्‍टरिंग प्रोडक्‍ट हैप्‍पीनेट्ज़ बॉक्‍स का अनावरण किया है। इस आयोजन को आगंतुकों से बड़ी ही प्रोत्‍साहक प्रतिक्रिया मिली, जिससे हैप्‍पीनेट्ज़ बॉक्‍स की असीम क्षमता का पता चलता है कि यह कैसे परिवारों के अपने बच्‍चों के लिए ज्‍यादा सुरक्षित एवं ज्‍यादा संतुलित ऑनलाइन अनुभव के लिए इंटरनेट के इस्‍तेमाल को मैनेज करने एवं उस पर पूरी निगरानी रखने के तरीके में बदलाव ला रहा है।

इस आयोजन को पैरेंट्स और विशेषज्ञों के लिये एक नेटवर्किंग प्‍लेटफॉर्म पैरेंट कोड पुणे का कम्‍युनिटी पार्टनर के तौर पर भी सहयोग मिला, जोकि नये जमाने की पैरेंटिंग को आसान बनाने वाली वर्कशॉप्‍स पर केन्द्रित है। एजेंसी पार्टनर द मिल ने इसे बढ़ावा दिया, जो एक बूटिक कंटेन्‍ट एण्‍ड ब्राण्‍ड मार्केटिंग एजेंसी है और स्‍टार्ट-अप्‍स तथा स्‍थापित ब्राण्‍ड्स के साथ काम कर रही है, ताकि उनकी डिजिटल यात्रा में सहयोग दे सके।

हैप्‍पीनेट्ज़ बॉक्‍स की कीमत 4000 से 5000 रुपये के बीच है और यह एक अत्‍याधुनिक उपकरण है, जो दमदार फीचर्स देने के लिये तैयार किया गया है। यह पैरेंट्स को इस्‍तेमाल में आसान एक बॉक्‍स देता है, ताकि वे अपने बच्‍चों के ऑनलाइन अनुभव को सुरक्षित कर सकें। इस प्रोडक्‍ट की मुख्‍य विशेषताओं में से एक है मोड-बेस्‍ड कैटेगराइजेशन सिस्‍टम, जो खासकर अलग-अलग आयु समूहों की जरूरतें पूरी करता है। तीन अलग मोड्स- किड (13 साल से कम आयु), टीन (13 साल और उससे ज्‍यादा आयु) और पैरेंट (18 साल और उससे ज्‍यादा आयु के वयस्‍क) से पैरेंट्स सेटिंग्‍स को सेट कर सकते हैं और अपने बच्‍चों के लिये निजी ऑनलाइन माहौल बना सकते हैं।

सुविधा एवं सुरक्षा बढ़ाने के लिये इस प्रोडक्‍ट को हैप्‍पीनेट्ज़ सेंट्रल सिस्‍टम से इंटीग्रेट किया गया है, जो 110 मिलियन से ज्‍यादा वेबसाइट्स और ऐप्‍स को 15 कैटेगरीज में बांटने के लिये फिल्‍टरिंग की उन्‍नत क्षमताओं का इस्‍तेमाल करता है। इस प्रकार पैरेंट्स को आसानी से यह कैटेगरीज़ ऑन या ऑफ करने की योग्‍यता मिलती है (एडल्‍ट एण्‍ड सिक्‍योरिटी और सेफ सर्च को छोड़कर) और सुनिश्चित होता है कि वे अपने बच्‍चों के लिये इंटरनेट से खेलने का एक सुरक्षित मैदान बना सकें। इस प्रोडक्‍ट की एक और अलग खूबी है इंटरनेट शेड्यूल फंक्‍शनैलिटी, जो पैरेंट्स को उनके बच्‍चों की अलग जरूरतों और पसंद के हिसाब से तैयार निजीकृत इंटरनेट एक्‍सेस लिमिट्स तय करने की योग्‍यता देती है।

इस अवसर पर बात करते हुए, हैप्‍पीनेट्ज़ की सह-संस्‍थापक एवं सीईओ सुश्री ऋचा सिंह ने कहा, ‘’कैट्स लर्निंग सेंटर, पुणे में हैप्‍पीनेट्ज़ बॉक्‍स का लॉन्‍च होना हमारे लिये एक महत्‍वपूर्ण उपलब्धि है। हमें परिवारों को एक क्रांतिकारी समाधान देने पर गर्व है, जो उन्‍हें इंटरनेट के इस्‍तेमाल को कंट्रोल करने में स‍मर्थ बनाता है। हमारा प्रोडक्‍ट सोच-समझकर डिजाइन किया गया है, ताकि 3 से 15 साल के बच्‍चों के स्‍क्रीन टाइम और अनुचित कंटेन्‍ट तक पहुँच को लेकर उनके पैरेंट्स की चिंताओं को दूर‍ किया जा सके। हमारे मुख्‍य लक्ष्‍यों में से एक है इस टेक्‍नोलॉजी को ज्‍यादा से ज्‍यादा परिवारों तक पहुँचाना। इसके लिये, हमने कीमतों के बजट में रहने वाली रणनीति अपनाई है और भारत के टीयर 1 और टीयर 2 शहरों पर विशेष ध्‍यान के साथ, शहरी क्षेत्रों में इसे लॉन्‍च करने का फैसला किया है, जहाँ 30% से ज्‍यादा आबादी है। एक अनुमान के अनुसार, इन क्षेत्रों के बाजार का संभावित आकार 80 से 100 मिलियन लोगों का है और 25.68% लोग हमारे लक्षित आयु समूह के हैं। अपनी प्रगति के साथ, हम यूजर के फीडबैक और लगातार विकसित हो रही टेक्‍नोलॉजी की बदौलत नवाचार को जारी रखने के लिये समर्पित हैं। हम ऐसा डिजिटल वातावरण बनाना चाहते हैं, जहाँ परिवार फलें-फूलें और कल के जिम्‍मेदार डिजिटल नागरिकों को बढ़ावा मिले।”

लॉन्‍च में कैट्स लर्निंग सेंटर की संस्‍थापक और एज्‍युकेशन पार्टनर श्रीमती श्रद्धा शाह रायकर ने बच्‍चों पर स्‍क्रीन टाइम के बुरे प्रभावों के बारे में बात की। उन्‍होंने कहा, “बचपन में स्‍क्रीन पर अधिक टाइम बिताने से बच्‍चों के भाषाई विकास और संज्ञानात्‍मक कौशल में विलंब होता है। इतना ही नहीं, इससे ध्‍यान देने की अवधि और कामों पर फोकस करने की क्षमता पर भी नकारात्‍मक असर पड़ता है।”

हैप्‍पीनेट्ज़ बॉक्‍स के केन्‍द्र में ही लचीलापन है। पैरेंट्स किसी खास दिन के लिये इंटरनेट का समय बढ़ा सकते हैं या हैप्‍पीनेट्ज़ नेटवर्क से जुड़े अलग-अलग उपकरणों पर इंटरनेट को पॉज़ कर सकते हैं। यह प्रोडक्‍ट सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि पैरेंट्स को अपने बच्‍चे द्वारा इंटरनेट के इस्‍तेमाल पर महत्‍वपूर्ण जानकारियाँ भी देता है। इस प्रकार वे ऑनलाइन गतिविधियों को जानकर स्‍क्रीन टाइम और डिजिटल आदतों के बारे में समझदारी से फैसले कर सकते हैं। हर वेबसाइट या ऐप में विशेष गतिविधियों पर नजर रखे बिना बच्‍चों की सर्च हिस्‍ट्री देखने में पैरेंट्स की मदद करने के अलावा, हैप्‍पीनेट्ज़ बॉक्‍स उन्‍हें उन्‍नत कस्‍टमाइजेशन के जरिये डोमेन विशेष को व्‍हाइटलिस्‍ट या ब्‍लैकलिस्‍ट करने देता है। इस प्रोडक्‍ट में दूसरे उपयोगी फीचर्स भी हैं, जैसे कि आपातकाल में अलर्ट भेजना (जैसे एसओएस), उपकरण का कनेक्‍शन हटाना, फिल्‍टर न रखना और इंटरनेट की समय अवधियों को खत्‍म करना। इसके अलावा, पैरेंट्स आसानी से नये उपकरण जोड़ सकते हैं, डिफॉल्‍ट सेटिंग्‍स में रिसेट कर सकते हैं और ज्‍यादा से ज्‍यादा फंक्‍शंस एक्‍सेस कर सकते हैं।

अपनी मूल्‍यवान बौद्धिक संपदा को सुरक्षित रखने के लिये कंपनी ने अपने बॉक्‍स के लिये सफलतापूर्वक एक पेटेंट फाइल किया है। उन्‍होंने बूटस्‍ट्रैप्‍ड मॉडल पर परिचालन करने और अपने मार्केटिंग चैनल ब्‍लॉगचैटर का इस्‍तेमाल कर ग्राहकों को प्रभावी तरीके से शामिल करने की योजना बनाई है। कंपनी ने महत्‍वाकांक्षी, लेकिन यथार्थपूर्ण लक्ष्‍य निर्धारित किये हैं और वह अपनी सुस्‍थापित मार्केटिंग पहलों के माध्‍यम से 20 मिलियन पैरेंट्स से जुड़ना चाहती है। सावधानी से तैयार किये गये एक मार्केटिंग कैम्‍पेन को लेकर उन्‍हें अगले 5 वर्षों में लक्षित लोगों में से 1% से 5% को हासिल करने की आशा है, जिससे कंपनी के मौजूदा मूल्‍य (8.54 मिलियन अमेरिकी डॉलर) में बढ़ोतरी होगी।

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