सूरजकुंड दिवाली मेले में छाई पंजाबी संस्कृति, फुलकारी और पटियाला सूट की खूब मांग

- दिल्ली के सरोजनी नगर से आए नील कमल के बूथ पर उपलब्ध हैं पंजाबी परिधानों की आकर्षक वैरायटी

सूरजकुंड (फरीदाबाद), 25 अक्टूबर।
हरियाणा पर्यटन विभाग द्वारा ‘आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी मेला’ की थीम पर आधारित तृतीय सूरजकुंड दिवाली मेले में देश के विभिन्न हिस्सों से आए शिल्पकारों और व्यापारियों के उत्पाद दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं। मेले में पारंपरिक परिधानों की भी खूब धूम है। दिल्ली के सरोजनी नगर मार्केट से आए नील कमल अपने बूथ नंबर 236 पर पंजाबी संस्कृति की झलक पेश कर रहे हैं। उनके बूथ पर पटियाला सूट, पंजाबी सूट, फुलकारी साड़ी और पंजाबी दुपट्टे की कई आकर्षक वैरायटी उपलब्ध हैं। पारंपरिक कढ़ाई और रंग-बिरंगे डिजाइनों से सजे ये परिधान मेले में आने वाले लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं।

नील कमल ने बताया कि उनके बूथ पर ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग डिजाइन और रंगों के परिधान उपलब्ध कराए गए हैं। पंजाबी दुपट्टे की शुरुआती कीमत 800 रुपये, फुलकारी साड़ी की कीमत 2200 रुपये और महिलाओं के पंजाबी सूट की कीमत 1200 रुपये से शुरू होती है। उन्होंने कहा कि मेले में आने वाले लोग पारंपरिक परिधानों को पसंद कर रहे हैं। फुलकारी की पारंपरिक कारीगरी और पंजाबी पहनावे की खासियत लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

स्वदेशी उत्पादों और पारंपरिक कला को मिल रहा बढ़ावा
सूरजकुंड दिवाली मेले का उद्देश्य देश की पारंपरिक कला, संस्कृति, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को व्यापक मंच उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पर्यटन मंत्री डा. अरविंद शर्मा भी मेले के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विरासत, स्वदेशी उत्पादों और शिल्पकारों को प्रोत्साहित करने पर जोर देते रहे हैं। मेले में विभिन्न राज्यों के उत्पादों की उपलब्धता से लोगों को एक ही स्थान पर विविधता देखने और खरीदारी करने का अवसर मिल रहा है।

पारंपरिक परिधानों के ऐसे स्टाल न केवल भारतीय संस्कृति की पहचान को आगे बढ़ाते हैं, बल्कि छोटे व्यापारियों और कारीगरों को अपने उत्पादों के प्रचार-प्रसार के लिए बेहतर मंच भी उपलब्ध कराते हैं।