किआ इंडिया ने 'प्रोजेक्ट बकल-अप' के तीसरे चरण की शुरूआत की, उत्तराखंड सरकार के सहयोग से शुरू किया सुरक्षा अभियान

नई दिल्ली, 16  जुलाई, 2026: देश की प्रमुख मास-प्रीमियम वाहन निर्माता कंपनियों में शामिल किआ इंडिया ने अपनी प्रमुख सीएसआर पहल 'प्रोजेक्ट बकल-अप' का विस्तार करते हुए द सोशल लैब (टीएसएल) फाउंडेशन के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में हुए इस समझौते के साथ प्रोजेक्ट बकल-अप का तीसरा चरण शुरू हो गया है।

मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में किआ इंडिया ने राज्य में सड़क सुरक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और सामुदायिक विकास को बढ़ावा देने को लेकर अपनी दीर्घकालिक सोच और प्रतिबद्धता पर भी चर्चा की।

इस साझेदारी के साथ 'प्रोजेक्ट बकल-अप' का तीसरा चरण शुरू हो गया है और इसके तहत देहरादून-मसूरी हाईवे पर चिन्हित स्थानों पर स्मार्ट सोलर सेंसर स्ट्रीटलाइट लगाई जाएंगी। इनका उद्देश्य रात में और खराब मौसम के दौरान दृश्यता बढ़ाकर स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए यात्रा को अधिक सुरक्षित बनाना है। यह पहल उत्तराखंड के सड़क सुरक्षा प्रयासों को भी मजबूती देगी।

इस पहल पर उत्तराखंड सरकार ने कहा, "उत्तराखंड सरकार 'बकल-अप' सड़क सुरक्षा पहल के माध्यम से राज्य की सड़कों को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में किआ इंडिया की प्रतिबद्धता का स्वागत करती है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु और पर्यटक उत्तराखंड आते हैं। ऐसे में सड़क सुरक्षा केवल बुनियादी ढांचे का विषय नहीं, बल्कि हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। सरकार, उद्योग और सामाजिक संगठनों के बीच साझेदारी से ही लोगों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता और जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा दिया जा सकता है। हमें खुशी है कि किआ इंडिया और टीएसएल फाउंडेशन इस पहल में राज्य सरकार के साथ जुड़े हैं। आने वाले वर्षों में इस सहयोग को और मजबूत कर पूरे राज्य में सुरक्षित एवं जिम्मेदार यातायात की संस्कृति विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा।"

किआ इंडिया के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (सेल्स एंड मार्केटिंग) अतुल सूद ने कहा, "हमारा मानना है कि मोबिलिटी का उद्देश्य केवल लोगों और स्थानों को जोड़ना नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। इसलिए हमारी जिम्मेदारी केवल सुरक्षित वाहन बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित सड़कें, मजबूत समुदाय और प्रभावी साझेदारियां विकसित करना भी है। 'प्रोजेक्ट बकल-अप' के माध्यम से हम सरकार, उद्योग, शिक्षण संस्थानों और समाज को एक मंच पर लाकर सड़क सुरक्षा में सार्थक सुधार लाने का प्रयास कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य सुरक्षित सड़कों को सभी की साझा जिम्मेदारी बनाना और सुरक्षित व टिकाऊ परिवहन को लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बनाना है।"

द सोशल लैब (TSL) के सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) साहिल अरोड़ा ने कहा, "सड़क सुरक्षा सभी की साझा जिम्मेदारी है। किआ इंडिया और उत्तराखंड सरकार के साथ मिलकर हम ऐसा वातावरण बनाना चाहते हैं, जहां हर व्यक्ति सुरक्षित अपने घर लौट सके। यह साझेदारी इस बात का उदाहरण है कि सरकार और उद्योग मिलकर लोगों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठा सकते हैं। हमारा साझा लक्ष्य उत्तराखंड की हर यात्रा को सुरक्षित बनाना है।"

प्रोजेक्ट बकल-अप का यह विस्तार इसके दूसरे चरण की सफलता पर आधारित है। दूसरे चरण के तहत दिल्ली-एनसीआर के 100 कॉलेजों में 20,000 से अधिक छात्रों को सड़क सुरक्षा से जोड़ा गया। इस दौरान 'कार सिम्युलेटर ऑन व्हील्स' के माध्यम से युवाओं और पहली बार वाहन चलाने वालों को सुरक्षित ड्राइविंग, संभावित खतरों की पहचान और जिम्मेदार ड्राइविंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।

इसके अलावा किआ इंडिया भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), राज्य सरकार की एजेंसियों, स्थानीय प्रशासन और अन्य साझेदारों के साथ मिलकर दिल्ली-उत्तराखंड हाईवे पर सड़क सुरक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगी। इसके तहत स्पीड अटेन्यूएटर्स लगाए जाएंगे तथा किआ ब्रांडेड 500 रोड सेफ्टी बैरिकेड्स भी स्थापित किए जाएंगे।

कंपनी का मानना है कि सुरक्षित सड़कें सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता के साथ-साथ बेहतर बुनियादी ढांचे की भी जरूरत होती है। इसी सोच के तहत 'प्रोजेक्ट बकल-अप' के पहले चरण में किआ इंडिया ने गुरुग्राम ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर शहर के दुर्घटना संभावित स्थानों पर 750 रिफ्लेक्टिव क्रैश बैरियर उपलब्ध कराए। इनसे विशेष रूप से रात में और कम दृश्यता की स्थिति में यातायात को सुरक्षित बनाने और दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने में मदद मिली।

कंपनी के अनुसार, प्रोजेक्ट बकल-अप सुरक्षित वाहन बनाने के साथ-साथ सुरक्षित सड़कें विकसित करने की उसकी व्यापक सोच का हिस्सा है। जागरूकता, जिम्मेदार ड्राइविंग, बेहतर सड़क ढांचे और विभिन्न संस्थाओं के सहयोग के माध्यम से यह पहल सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने और समाज पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ने की दिशा में काम कर रही है।