तिगांव क्षेत्र में भाजपा नेताओं के कार्यालयों से चल रहा एसआईआर अभियान लोकतंत्र के लिए खतरा: रोहित नागर
तिगांव विधानसभा के पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी ने पत्रकार सम्मेलन में बीएलओ की निष्पक्षता पर उठाए सवाल, क्षेत्र में हजारों फर्जी वोटों का लगाया आरोप
फरीदाबाद, 16 जून। तिगांव विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी रोहित नागर ने विशेष मतदाता पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए भाजपा सरकार और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण के नाम पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने तथा विपक्ष समर्थक मतदाताओं को हाशिए पर धकेलने का सुनियोजित प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के बजाय भाजपा सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाकर अपने राजनीतिक हित साधने में लगी हुई है। रोहित नागर मंगलवार को अपने कार्यालय पर आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उनके साथ युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विकास दायमा, विजयपाल ठेकेदार, शालिनी चौपडा, तिगांव विधानसभा के युवा अध्यक्ष पंकज सिंह कश्यप, हामिद खान, मनीष नेगी, विकास नेगी आदि अनेकों कांग्रेस नेता मौजूद थे।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता रोहित नागर ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त किए गए कई बीएलओ निष्पक्ष रूप से कार्य करने के बजाय भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों के प्रभाव में काम कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तिगांव विधानसभा क्षेत्र में भाजपा पार्षद और भाजपा नेताओं के कार्यालयों पर लोगों को बुलाकर एसआईआर के फार्म भरवाए जा रहे हैं, जो चुनाव आयोग के निर्धारित नियमों और पारदर्शिता की भावना के विपरीत है। उन्होंने पत्रकारों के समक्ष बूथ नंबर-80, संजय कॉलोनी-श्याम कॉलोनी, सेतहपुर की मतदाता सूची प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में एक ही महिला के नाम से लगभग 30 अलग-अलग स्थानों पर मतदाता पंजीकरण दर्ज है। उन्होंने कहा कि उक्त महिला का नाम आशा देवी, संतोष, सुनीता पाल, मीना रानी सहित कई अन्य नामों से अलग-अलग क्रमांकों पर दर्ज पाया गया। इसके अलावा एक अन्य महिला का नाम सात स्थानों पर तथा एक पुरुष का नाम चार स्थानों पर दर्ज है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक बूथ का उदाहरण है जबकि तिगांव विधानसभा क्षेत्र में कुल 345 बूथ हैं। यदि पूरे क्षेत्र की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो हजारों फर्जी वोट सामने आ सकते हैं।
रोहित नागर ने बीएलओ द्वारा भाजपा पार्षद के कार्यालय में लोगों से फार्म भरवाने का एक वीडियो भी पत्रकारों को दिखाया और कहा कि इससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं। उन्होंने सभी बीएलओ से अपील की कि वे किसी राजनीतिक दबाव में आए बिना चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार घर-घर जाकर सर्वेक्षण करें। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के नियम स्पष्ट हैं कि मतदाता के घर पर जाकर सत्यापन किया जाएगा तथा अनुपस्थिति की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी भी बीएलओ द्वारा अपने कर्तव्यों में लापरवाही बरती गई या राजनीतिक प्रभाव में कार्य किया गया तो उसकी शिकायत जिला उपायुक्त एवं चुनाव आयोग को साक्ष्यों सहित भेजी जाएगी और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की जाएगी।
पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी रोहित नागर ने आरोप लगाया कि हरियाणा में भाजपा सरकार फर्जी वोटों और चुनावी हेरफेर के सहारे सत्ता तक पहुंची है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनावों से पहले ही भाजपा नेताओं द्वारा सरकार बनने का दावा करना इस बात का संकेत था कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिशें पहले से ही चल रही थीं। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का मताधिकार है और यदि उसी के साथ छेड़छाड़ की जाएगी तो लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता का विश्वास कमजोर होगा।
रोहित नागर ने भाजपा सरकार पर जनविरोधी नीतियां लागू करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी, महंगाई, कानून-व्यवस्था और किसानों की समस्याओं जैसे वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए सरकार प्रशासनिक प्रक्रियाओं का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आज तक वर्ष 2002 की मतदाता सूची सार्वजनिक नहीं की गई है और न ही कांग्रेस पार्टी द्वारा नियुक्त बीएलए-2 की सूची को चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है, जबकि कांग्रेस पार्टी समय पर सभी आवश्यक दस्तावेज आयोग को सौंप चुकी है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता की कमी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को संदेह के घेरे में खड़ा करती है।
रोहित नागर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र, संविधान और निष्पक्ष चुनावी व्यवस्था की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी तथा जनता के मताधिकार पर किसी भी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सत्य और पारदर्शिता के आधार पर ही लोकतंत्र मजबूत हो सकता है, न कि सत्ता के दुरुपयोग और प्रशासनिक दबाव के सहारे।