श्रीसिद्धदाता आश्रम में स्कंदमाता की पूजा में की गई विश्व कल्याण की कामना

-संतान के सुखमयी जीवन के लिए श्रद्धालुओं ने की स्कंदमाता की पूजा

फरीदाबाद।

...या देवी सर्वभूतेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।-जैसे भाव से चैत्र नवरात्रि उत्सव के पांचवे दिन सूरजकुंड मार्ग स्थित श्रीलक्ष्मी नारायण दिव्यधाम-श्रीसिद्धदाता आश्रम में चल रहे आदिशक्ति मां दुर्गा के विशेष अनुष्ठान में पहुंचे श्रद्धालुओं ने आदिशक्ति मां दुर्गा के पंचम स्वरुप अधिष्ठात्री स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की गई। स्वामी सुदर्शनाचार्य वेद वेदांग संस्कृत महाविद्यालय के विद्यार्थियों और आचार्यो द्वारा किए गए देवी पुराण महाभागवत के मंत्रोच्चार के साथ युवाचार्य स्वामी अनिरुद्धाचार्य जी ने विश्व कल्याण की विशेष-पूजा-अर्चना की। आयोजित अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने ममतामयी स्कंदमाता की संतान के सुखमयी जीवन के लिए मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की। कुछ श्रद्धालु नारियों ने मां के लाल वस्त्र, सुहाग श्रंगार लाल चूड़ी, महावर, लाल बिंदी, लाल फूल एवं चावल बांधकर मां की गोद भरके संतान प्राप्ति की मनोकामना की।
   श्रीसिद्धदाता आश्रम के अधिष्ठाता एवं श्रीरामानुज संप्रदाय की तीर्थ पीठ इंद्रप्रस्थ एवं हरियाणा के पीठाधीश्वर अनंतश्री विभूषित श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्रीपुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने विशेष पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं को अपने प्रवचन में आदिशक्ति मां दुर्गा के पंचम स्वरुप स्कंदमाता की कथा में प्रस्तुत किया कि भगवान स्कंद की माता होने के कारण अधिष्ठात्री स्कंदमाता के नाम से विख्यात हैं। सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी आदिशक्ति स्कंदमाता की मनोहर छवि दिव्य शक्ति के समान पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त है। स्कंदमाता कार्तिकेय और गणेश की मां है। गणेश जी मानसपुत्र हैं और कार्तिकेय गर्भ से उत्पन्न हुए। राक्षस तारकासुर का अंत करने के उद्देश्य से कार्तिकेय उत्पन्न हुए। दिव्यधाम में इस दौरान  स्वामी जी ने भक्तों को प्रसाद और आशीर्वाद प्रदान किया।