चैत्र नवरात्रि में आदिशक्ति दुर्गा की स्तुति से गूंजा दिव्यधाम

- श्रद्धाभाव से की गई विश्व कल्याण के लिए पूजा अर्चना

Faridabad News : या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

वन्दे वंछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। |

वृषारूढाम् शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।। सूरजकुंड मार्ग स्थित श्रीलक्ष्मी नारायण दिव्यधाम-श्रीसिद्धदाता आश्रम में गुरुवार को श्रीरामानुज संप्रदाय के तीर्थ स्थल इंद्रप्रस्थ एवं हरियाणा पीठ के

पीठाधीश्वर अनंतश्री विभूषित जगदगुरु स्वामी श्रीपुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज के सान्निध्य में आचार्यों ने देवीपुराण मंत्रोच्चरण के साथ विश्व कल्याण की विशेष पूजा-अर्चना के चैत्र नवरात्रि की शुरुआत की। इससे पहले नौ दिन चलने वाले विशेष अनुष्ठान की शुरुआत विधिविधान मंत्रोच्चार करते हुए युवा आचार्य स्वामी श्रीअनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने
आदिशक्ति मां भगवती के नौ रूपों की आराधना के लिए घट की स्थापना संपन्न कराई। इस अनुष्ठान में देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु साधक आदिशक्ति मां दुर्गा के बीज मंत्रों का जाप करेंगे। भवन में आदिशक्ति मां जगदंबा का एक मंडप तैयार किया गया। जिसमें बहुत सुंदर शक्ति की मूर्ति स्थापित है। जिनके दर्शन के लिए आश्रम में श्रद्धालुओ की भीड़ उमड़ी। ऐसा माना जाता है की दिव्यधाम में श्रद्धा रखने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना के साथ जीवन में कल्याण अवश्य होता है।

अनंतश्री विभूषित जगदगुरु स्वामी श्रीपुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने अपने प्रवचन में आदिशक्ति मां दुर्गा के प्रथम स्वरुप शैलपुत्री के व्याख्यान में कहा कि पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण यह शैलपुत्री नाम से प्रसिद्ध हुई। इनके पूजन से मूलाधार चक्र जाग्रत होता है। जिससे साधकों को मूलाधार चक्र से प्राप्त होने वाली ऊर्जा से सुख स्मृद्धि प्राप्त होती हैं। माता सती ने योगाग्नि द्वारा अपने शरीर को भस्म करके अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया और वे शैलपुत्री नाम से विख्यात हुर्ईं। पार्वती, हैमवती भी उन्हीं के नाम हैं। उपनिषद् की एक कथा के अनुसार इन्हीं ने हैमवती स्वरूप से देवताओं का गर्व-भंजन किया था। इसी प्रकार इन नौ दिनों में आदिशक्ति मां दुर्गा के विभिन्न शक्ति स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। नवरात्रि में श्रद्धालुओं को यथाशक्ति व्रत, उपवास, नाम जप, दान आदि करना चाहिए। इस अवसर पर स्वामी जी ने भक्तों को आशीर्वाद एवं प्रसाद प्रदान किया।