महासप्तमी की पूजा में मां कालरात्रि शक्ति से भक्तों को मिला अंधकार से प्रकाश का आशीर्वाद

फरीदाबाद।...या देवी सर्वभूतेषु मां कालरात्रि रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। जैसे भाव से चैत्र नवरात्रि उत्सव के सातवें दिन सूरजकुंड मार्ग स्थित श्रीलक्ष्मी नारायण दिव्यधाम-श्रीसिद्धदाता आश्रम में चल रहे आदिशक्ति मां दुर्गा के विशेष अनुष्ठान में पहुंचे श्रद्धालुओं ने आदिशक्ति मां दुर्गा के सप्तम स्वरुप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की गई। स्वामी सुदर्शनाचार्य वेद वेदांग संस्कृत महाविद्यालय के विद्यार्थियों और आचार्यो द्वारा किए गए देवी पुराण महाभागवत के मंत्रोच्चार के साथ युवाचार्य स्वामी अनिरुद्धाचार्य जी ने विश्व कल्याण की विशेष-पूजा-अर्चना की। आयोजित अनुष्ठान में भक्तो के जीवन से अंधकार को मिटाने और देश के शत्रुओं का विनाश की प्रार्थना की।

श्रीसिद्धदाता आश्रम के अधिष्ठाता एवं श्रीरामानुज संप्रदाय की तीर्थ पीठ इंद्रप्रस्थ एवं हरियाणा के पीठाधीश्वर अनंतश्री विभूषित श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्रीपुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने विशेष पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं को अपने प्रवचन में आदिशक्ति मां दुर्गा के सप्तम स्वरुप कालरात्रि की कथा में प्रस्तुत किया कि मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, लेकिन ये अपने भक्तो को सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं। इसलिए भक्तों को किसी प्रकार भी भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। मां कालरात्रि दुष्टों का विनाश करने वाली हैं। दानव, दैत्य, राक्षस, भूत, प्रेत आदि इनके स्मरण मात्र से ही भयभीत होकर भाग जाते हैं। साधक को एकनिष्ठ भाव से इनकी पूजा यम, नियम, संयम का पालन करते हुए करना चाहिए। इस मौके पर स्वामी जी ने भक्तो को आशीर्वाद और प्रसाद वितरित किया।