नाबार्ड के स्वयं सहायता समूह की स्टॉल पर विभिन्न राज्यों के सामान कर रहे प्रभावित
-हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उतर प्रदेश, झारखंड और बिहार सहित विभिन्न राज्यों के स्वयं सहायता समूहों ने मेला परिसर में लगाएं हैं स्टॉल
-घर का सजावटी सामान सहित हिमाचल की टोपी, हरियाणा के कपड़े के बैग और झारखंड के क्रॉकरी आइटम कर रहे आकर्षित
सूरजकुंड (फरीदाबाद), 12 फरवरी।
39 वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव-2026 में नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) द्वारा समर्थित स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की भागीदारी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार सहित विभिन्न राज्यों से आए स्वयं सहायता समूहों ने मेला परिसर में अपनी स्टॉल लगाकर ग्रामीण शिल्प, हस्तनिर्मित उत्पादों और पारंपरिक कला का शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं।
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी और पर्यटन विभाग मंत्री डा. अरविंद कुमार शर्मा के निर्देशन में आयोजित किए जा रहे सूरजकुंड मेला में नाबार्ड के सहयोग से ग्रामीण महिलाओं और कारीगरों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। इन स्टॉलों पर घर की सजावट का सामान, हस्तनिर्मित वस्त्र, पारंपरिक आभूषण, प्राकृतिक रंगों से बने उत्पाद, क्रॉकरी आइटम, कपड़े के बैग तथा हस्तशिल्प की विविध श्रृंखला प्रदर्शित की जा रही है। हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक टोपी, उत्तर प्रदेश और बिहार की हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुएं, झारखंड के जनजातीय शिल्प और हरियाणा के कपड़े के आकर्षक बैग दर्शकों को विशेष रूप से लुभा रहे हैं।
नाबार्ड की ओर से लगाई गई स्टॉल के संचालकों ने बताया कि सूरजकुंड मेला ऐसा मंच है जो ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ पारंपरिक कला और शिल्प को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हैं। उनके स्वयं सहायता समूहों के सदस्य अपने उत्पादों की बिक्री करने के साथ- साथ पर्यटक को उनके निर्माण की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दे रही हैं, जिससे ग्रामीण संस्कृति और कौशल के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।
मेले में आए पर्यटक इन उत्पादों की गुणवत्ता और कारीगरी से काफी प्रभावित हो रहे हैं। नाबार्ड का उद्देश्य इन समूहों को बाजार उपलब्ध कराना, उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को मजबूत करना है।