सूरजकुंड मेला में अनेक प्रकार के खिलौने बच्चों के मन को भाए 

- खिलौनों के साथ बच्चों के लिए उपयोगी पुस्तकें भी उपलब्ध 

- शतरंज और पजल जैसे दिमागी कसरत वाली आइटम भी आ रहे पसंद 

सूरजकुंड (फरीदाबाद), 13 फरवरी।
39वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव 2026 में रंग-बिरंगे, पारंपरिक और शैक्षणिक खिलौने बच्चों के लिए आकर्षण का विशेष केंद्र बने हुए हैं। देश के विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों द्वारा तैयार किए गए हस्तनिर्मित खिलौने बच्चों के मन को खूब भा रहे हैं। अभिभावक भी स्वदेशी और सुरक्षित सामग्री से तैयार इन खिलौनों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

सूरजकुंड मेला परिसर में उपलब्ध खिलौनों की विविधता बच्चों को रचनात्मकता और सीखने की ओर प्रेरित कर रही है। पारंपरिक गुड्डे-गुड़िया, लकड़ी की गाड़ियां, हाथ से रंगे पशु-पक्षियों के मॉडल तथा शैक्षणिक बोर्ड गेम्स की विशेष मांग देखी जा रही है। खास बात यह है कि कई स्टॉलों पर पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से तैयार खिलौने उपलब्ध हैं, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना को सशक्त करते हैं।

खिलौनों के साथ-साथ बच्चों के लिए उपयोगी और ज्ञानवर्धक पुस्तकें भी मेले में आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। नैतिक कहानियों, चित्र पुस्तकों, लोककथाओं और सामान्य ज्ञान से संबंधित पुस्तकों की खरीदारी में अभिभावक विशेष रुचि दिखा रहे हैं। इन स्टॉल संचालकों का कहना है कि डिजिटल युग में भी बच्चों में पुस्तकों के प्रति उत्साह कम नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त शतरंज, पजल, सुडोकू और अन्य दिमागी कसरत वाले खेल भी बच्चों और युवाओं को खूब पसंद आ रहे हैं। ये खेल न केवल मनोरंजन प्रदान करते हैं, बल्कि तार्किक सोच और एकाग्रता बढ़ाने में भी सहायक हैं। 

शिल्पकारों का कहना है कि सूरजकुंड मेला में उमड़ी भीड़ और बच्चों के उत्साह को देखते हुए स्पष्ट है कि सूरजकुंड मेला केवल सांस्कृतिक विरासत का उत्सव नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के समग्र विकास का भी सशक्त मंच बन चुका है। मेला प्रशासन द्वारा बेहतरीन व्यवस्थाएं उपलब्ध करवाई गई हैं जिसके लिए उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी और पर्यटन मंत्री डा. अरविंद कुमार शर्मा का आभार व्यक्त करते हुए प्रबंधन कमेटी की सराहना की।