सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले में हरिद्वार के राजकुमार के जूट उत्पाद बने पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र
सूरजकुंड (फरीदाबाद), 13 फरवरी।
अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेले में देशभर से आए कारीगर अपनी पारंपरिक हस्तकला और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के माध्यम से पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। इसी कड़ी में बड़ी चौपाल के पास स्टॉल नंबर-296 पर हरिद्वार से आए स्टॉल संचालक राजकुमार द्वारा प्रस्तुत जूट से बने सजावटी और उपयोगी उत्पाद लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।
राजकुमार ने बताया कि उनके स्टॉल पर जूट से बने चिडिय़ों के घोंसले, दाना-पानी के बर्तन, चिडिय़ों के लिए हैंगिंग हाउस, हैंगिंग डेकोर, वॉल हैंगिंग, शोपीस और घर की सजावट से जुड़े कई आकर्षक सामान उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि उनके सभी उत्पाद प्राकृतिक जूट से हाथों द्वारा तैयार किए गए हैं, जो न केवल देखने में सुंदर हैं, बल्कि मजबूत, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल भी हैं।
घर की सजावट के लिए बढ़ती पसंद :
राजकुमार ने बताया कि आज के समय में लोग अपने घरों को प्राकृतिक और इको-फ्रेंडली सजावटी वस्तुओं से सजाना पसंद कर रहे हैं। जूट से बने उनके उत्पाद घर के ड्राइंग रूम, बालकनी, गार्डन और बच्चों के कमरों की सुंदरता को बढ़ाने में सहायक साबित हो रहे हैं। खासतौर पर चिडिय़ों के घोंसले और हैंगिंग हाउस लोगों को प्रकृति से जोडऩे का संदेश दे रहे हैं।
मेले में आने वाले कई पर्यटक इन उत्पादों को अपने घर की सजावट के साथ-साथ उपहार के रूप में भी खरीद रहे हैं, क्योंकि ये वस्तुएं पारंपरिक कला, पर्यावरण संरक्षण और रचनात्मकता का सुंदर संगम प्रस्तुत करती हैं।
100 रुपये से 500 रुपये तक की है किफायती और आकर्षक रेंज :
स्टॉल संचालक राजकुमार ने जानकारी दी कि उनके स्टॉल पर उपलब्ध सभी उत्पादों की कीमत 100 रुपये से लेकर 500 रुपये तक रखी गई है, ताकि हर वर्ग के लोग इन्हें आसानी से खरीद सकें। किफायती दाम और बेहतरीन गुणवत्ता के कारण उनके स्टॉल पर दिनभर ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है।
पर्यटकों का कहना है कि यहां मिलने वाले जूट उत्पाद कम कीमत में बेहतरीन डिजाइन, मजबूत गुणवत्ता और प्राकृतिक लुक प्रदान करते हैं, जो बाजार में मिलने वाले प्लास्टिक और मशीन से बने सामान की तुलना में अधिक आकर्षक और टिकाऊ हैं।
पक्षी प्रेम और पर्यावरण संरक्षण का संदेश :
राजकुमार ने बताया कि उनके द्वारा बनाए गए चिडिय़ों के घोंसले, दाना-पानी के बर्तन और हैंगिंग हाउस केवल सजावटी वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि यह पक्षियों के संरक्षण और प्रकृति प्रेम का संदेश भी देते हैं। उन्होंने कहा कि आज शहरीकरण के कारण पक्षियों के लिए सुरक्षित स्थान कम होते जा रहे हैं, ऐसे में उनके उत्पाद पक्षियों को आश्रय देने का एक सकारात्मक प्रयास हैं।
कई पर्यटकों ने बताया कि वे इन वस्तुओं को खरीदकर अपने घरों और बाग-बगीचों में पक्षियों के लिए सुरक्षित स्थान बनाना चाहते हैं, जिससे बच्चों में भी प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़े।
ग्रामीण कारीगरों को मिल रहा रोजगार
राजकुमार ने बताया कि इन जूट उत्पादों के निर्माण में कई ग्रामीण कारीगर और परिवार जुड़े हुए हैं, जिन्हें इससे रोजगार और आर्थिक सहयोग मिल रहा है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल व्यापार करना नहीं, बल्कि ग्रामीण हस्तकला को बढ़ावा देना, कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाना और पारंपरिक शिल्प को जीवित रखना भी है। उन्होंने यह भी कहा कि सूरजकुंड मेला जैसे बड़े आयोजन शिल्पकारों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का एक सशक्त मंच प्रदान करते हैं।
पर्यटकों में बढ़ती मांग, स्टॉल बना आकर्षण का केंद्र
मेले में आने वाले पर्यटकों का कहना है कि वे यहां मिलने वाले प्राकृतिक, हैंडमेड और इको-फ्रेंडली उत्पादों को बेहद पसंद कर रहे हैं। खासकर घर की सजावट, गार्डन डेकोर और पक्षियों से जुड़े उत्पाद लोगों को काफी आकर्षित कर रहे हैं। स्टॉल नंबर-296 वर्तमान में मेले के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हो गया है, जहां सुबह से लेकर देर शाम तक ग्राहकों की अच्छी-खासी भीड़ देखी जा सकती है। उनके जूट उत्पाद यह साबित कर रहे हैं कि प्राकृतिक और हस्तनिर्मित वस्तुएं आज भी लोगों के दिलों में खास स्थान रखती हैं और भविष्य में इनकी मांग और अधिक बढऩे की संभावना है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सकारात्मक पहल
राजकुमार ने कहा कि उनका सपना है कि वह अपने जूट उत्पादों को देशभर में और अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाएं और अधिक से अधिक कारीगरों को रोजगार प्रदान करें। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में जूट आधारित उत्पाद पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी उद्योग को मजबूती प्रदान करेंगे। उन्होंने मेला में उपलब्ध करवाई गई बेहतरीन सुविधाओं और व्यवस्थाओं के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी और पर्यटन मंत्री डा. अरविंद कुमार शर्मा को धन्यवाद व्यक्त किया।