सहारनपुर के शिल्पकार पुश्तैनी हुनर से जीत रहे पर्यटकों का दिल
- काष्ठ कला बनी आकर्षण का केंद्र
फरीदाबाद, 04 फरवरी।
अरावली की सुंदर पहाडय़िों की गोद में आयोजित अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला इन दिनों देश-विदेश की कला और संस्कृति का अद्भुत संगम बन रहा है। हरियाणा के पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित 39वां सूरजकुंड मेला विभिन्न राज्यों की कलाकृतियां भारतीय हस्तशिल्प की विविधता और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को बखूबी दर्शा रहा हैं।
मेले में मुख्य चौपाल के पास उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से आए शिल्पकार द्वारा वुड हैंडीक्राफ्ट कला का सामान लगाया हुआ है जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन रहा है। सहारनपुर से आए इन शिल्पकार ने बताया कि यह केवल व्यापार नहीं, बल्कि उनकी पुश्तैनी विरासत है। वे कई दशकों से सूरजकुंड मेले का हिस्सा बन रहे हैं। लकड़ी को तराश कर बनाई गई सुंदर आकृतियों और घरेलू सजावट के सामान में उनकी कई पीढय़िों का अनुभव साफ झलकता है।
किफायती दाम और बेहतरीन गुणवत्ता
सहारनपुर के स्टॉल पर पर्यटकों के लिए हर बजट का सामान उपलब्ध है। शिल्पकारों के पास 100 रुपए के छोटे सजावटी सामान से लेकर 7 हजार रुपए तक के नक्काशीदार फर्नीचर और कलाकृतियां मौजूद हैं। मेले में आने वाले पर्यटक सहारनपुर की इस कला की जमकर सराहना कर रहे हैं। हस्तशिल्प की गुणवत्ता और वाजिब दाम के कारण इन स्टॉलों पर खरीदारों की भारी भीड़ देखी जा रही है। शिल्पकारों का कहना है कि सूरजकुंड मेला उन्हें न केवल एक बड़ा मंच देता है, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की दिशा में उनके हुनर को नई उड़ान भी प्रदान करता है।