आज सूर्य ग्रहण, इसके 15 दिन पड़ेगा चंद्र ग्रहण, होलिका दहन और रंगों की होली कब होगी, भद्रा का साया...
न्यूज़ : आज साल का पहला सूर्य ग्रहण लग रहा है। यह 2026 का वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें रिंग ऑफ फायर का नजारा दिखेगा। इस ग्रहण का स्पर्श भारतीय समयानुसार दिन में 05:13 बजे, ग्रहण का मध्य 05:42 बजे एवं ग्रहण का मोक्षकाल 06:11 बजे होगा। भारत में इसका धार्मिक प्रभाव मान्य नहीं होगा और सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। इसके बाद अगला चंद्र ग्रहण होगा जो 15 दिन बाद फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन लगेगा। इसके कारण होली की तिथि में बदलाव किया गया है। आपको बता दें कि फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा की रात में होलिका दहन और इसके अगले दिन होली (धुलेंडी) मनाने की परंपरा रही है। लेकिन भद्रा और चंद्रग्रहण होने से इस वर्ष इसमें बदलाव हो रहा है। इस साल दो मार्च को होलिका दहन और इसके एक दिन बाद चार मार्च को होली मनाई जाएगी।
होली कब मनेगी, होलिका दहन कब होगा
वर्ष पंचांग गणना और शास्त्रीय निर्णय के आधार पर पर्व तिथियों में आंशिक परिवर्तन की सलाह ज्योतिषी दे रहे हैं। ज्योतिर्वेद विज्ञान संस्थान पटना के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ. राजनाथ झा बताते हैं कि पंचांगों के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा का आरंभ दो मार्च की शाम 5 बजे के बाद हो रहा है। पूर्णिमा 3 मार्च की शाम तक रहेगी। 2 मार्च को पूर्णिमा लगते ही भद्रा का प्रवेश हो रहा है। धर्म सिन्धु के अनुसार 'निशीथोत्तरं भद्रासमाप्तौ मुखं त्यक्त्वा भद्रायामेव होलिकादाहः' मतलब भद्रा के मुखकाल को त्यागकर उसके पुच्छकाल में ही होलिका दहन करना चाहिए। इसी आधार पर 2 मार्च की अर्धरात्रि के बाद (12.50 बजे से 02.02 बजे तक) भद्रा के पुच्छकाल में होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत रहेगा।
शाम 5.50 बजे से चंद्रग्रहण लग रहा
ज्योतिषाचार्य डॉ. राजनाथ झा बताते हैं कि तीन मार्च की शाम 5.50 बजे से 6.47 बजे के बीच चंद्रग्रहण लग रहा है। मान्यता है कि चंद्र ग्रहण से लगभग नौ घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। मतलब 3 मार्च की सुबह नौ बजे से सूतक शुरू हो जाएगा।
सूतक को लेकर शास्त्रों में
सूतक को लेकर शास्त्रों में कहा गया है कि 'ग्रहणे सूतके प्राप्ते न कुर्यात् शुभमङ्गलम' मतलब ग्रहण एवं सूतक काल में शुभ और मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। इसलिए तीन मार्च को रंगोत्सव मनाना ठीक नहीं है। इस दिन केवल जप, ध्यान और पूजन-पाठ ही किया जाना चाहिए। चार को होली मनाना उचित होगा।
4 मार्च - स्नान-शुद्धि के बाद रंगोत्सव
पं. प्रेम सागर पांडेय ने बताया कि तीन मार्च को चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद अगले दिन 4 मार्च को पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और घृति, शूल योग में इस वर्ष होली का त्योहार मनाया जाएगा। घृति योग को बेहद शुभ माना जाता है। 4 मार्च को प्रतिपदा शाम तक रहेगी। इस दिन सूर्य नक्षत्र शतभिषा और सूर्य राशि कुंभ रहेगा।