“पायलट ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजीज” के विकास के लिए समझौता ज्ञापन

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Faridabad News, 15 April 2022 : विद्युत क्षेत्र में कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के देश के संकल्प के अनुरूप, एनएचपीसी इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए श्री ए.के. सिंह, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एनएचपीसी की गतिशील और ऊर्जावान नेतृत्व के तहत अक्षय ऊर्जा संसाधनों के विकास में अग्रणी रहा है। जिला प्रशासन, चंबा (हिमाचल प्रदेश) और एनएचपीसी लिमिटेड के बीच जिला चंबा, हिमाचल प्रदेश में दिनांक 15 अप्रैल 2022 को “पायलट ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजीज” के विकास के लिए एक समझौता ज्ञापन (“एमओयू”) पर हस्ताक्षर किए गए। डी. सी. राणा, आई.ए.एस. हिमाचल प्रदेश की ओर से चंबा के उपायुक्त एवं जिला मजिस्ट्रेट एवं श्री ए.के. पाठक, एनएचपीसी रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एनएचपीसी लिमिटेड की ओर से, श्री जय राम ठाकुर, माननीय मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश, श्री किशन कपूर,सांसद कांगड़ा व श्री पवन नय्यर, विधायक चम्बा तथा श्री राम सुभाग सिंह, मुख्य सचिव, हिमाचल प्रदेश की गरिमामयी उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए । इस अवसर पर सुरजीत कुमार संधू, समूह महाप्रबंधक चमेरा-II & III पावर स्टेशन भी उपस्थित थे।

समझौता ज्ञापन के अनुसार, एनएचपीसी जिला चंबा (हिमाचल प्रदेश) में हाइड्रोजन उत्पादन सहित एक पायलट ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी प्रोजेक्ट विकसित करेगा। एनएचपीसी विभिन्न क्षेत्रों जैसे मोबिलिटी, परिवहन, हीटिंग, माइक्रो ग्रिड में हिमाचल प्रदेश की हाइड्रोजन जरूरतों की आपूर्ति के लिए वाणिज्यिक पैमाने पर हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ाएगी और बाद में समझौता ज्ञापन पर अलग से हस्ताक्षर किए जाएंगे।

यह पायलट परियोजना हरित हाइड्रोजन के भविष्य के विकास और परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन में कमी के लिए रोडमैप तैयार करेगी और हिमाचल प्रदेश के युवाओं के लिए विभिन्न राजस्व क्षेत्रों और रोजगार के अवसरों का निर्माण करते हुए हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक निवेश को भी आकर्षित करेगी।

एनएचपीसी ने अक्षय ऊर्जा, लघु हाइड्रो और हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं के विकास के लिए एक पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी का गठन किया है जिसका नाम एनएचपीसी रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड (एनआरईएल) है। यह परियोजना एनएचपीसी रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड, एनएचपीसी के अनुसंधान एवं विकास विभाग और एनएचपीसी लिमिटेड के चमेरा-II पावर स्टेशन द्वारा निष्पादित की जाएगी।
कोप-26 में माननीय प्रधान मंत्री ने घोषणा की थी कि भारत मे 2070 तक कार्बन न्यूट्रल हो जाएगा और 2030 तक भारत गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से 500 गीगावाट उत्पन्न करेगा जो कुल स्थापित क्षमता का 50% होगा और हिमाचल सरकार की इस पहल के तहत हिमाचल प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री और एनएचपीसी का गतिशील नेतृत्व इस मामले में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

 

 

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