विश्व के उच्च कोटि के शिक्षा संस्थानों में शिक्षा और वह भी बिल्कुल फ्री

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Faridabad News : यस जर्मनी संस्था द्वारा आयोजित जर्मन एजुकेशन कॉन्फ्रेंस 2017 मथुरा रोड स्थित होटल रेडिसन में संपन्न हुई इस कॉन्फ्रेंस में संस्था के पदाधिकारियों के अलावा शहर के बुद्धिजीवी जो स्टूडेंट जर्मन में पढ़कर आए हैं या पढ़ने गए हुए हैं उनके अभिभावक और पत्रकार बंधु मौजूद रहे पत्रकार वार्ता में अपने विचार रखते हुए प्रसिद्ध मोटिवेशन स्पीकर तरुण शर्मा जी ने कहा कि भारत के जो छात्र IIT कॉलेज में दाखिला लेने से वंचित रह जाते हैं। जर्मनी उनके लिए बेहतर विकल्प है क्योंकि जर्मन में शिक्षा का स्तर काफी ऊंचा है और बेहतर मापदंड है शिक्षा ग्रहण करने के बाद जर्मनी में ही अच्छी नौकरी के बेहतर विकल्प है। मगर वही अगर बेहतर विकल्प और उच्च तकनीकी शिक्षा के लिए देखा जाए तो जर्मनी इन सबसे बेहतर और लगभग मुफ्त में ही शिक्षा प्राप्त करने का विकल्प है। जहां उच्च मापदंड व बेहतर तकनीक अच्छी सुविधा और बेहतरीन नौकरी के विकल्प के तौर पर एक अच्छा चुनाव होगा जर्मन से आई हुई।

श्रीमती बेअते रेंनिंगेर (जर्मन गूव्ट इंटरनेशनल ऑफिसर) ने कहा कि आप हमारे जर्मन आइए आपको शिक्षा के साथ-साथ बेहतरीन व्यवस्थाएं मिलेंगी जर्मन आपका इंडियन करी विद जर्मन बियर के साथ स्वागत करने को तैयार है यह उन अभिभावकों के लिए सुनहरा अवसर है जो अपने बच्चों को अच्छे संस्थानो मे पढ़ाना चाहते है मगर पैसे की कमी के कारण पढ़ा नही पाते। श्रीमती रेंनिंगेर ने बताया कि जर्मनी के स्कूल में कैसे और क्या सिखाया जाता है कैसे वहां के लोग अपना करियर चुनते हैं वहां के स्कूल में स्टूडेंट्स अपनी इच्छा और क्षमता के बारे में जानते हैं और कहते हैं आर MP एक ऐसा माध्यम है जिससे अपने अंदर की क्षमताओं के बारे में पता कर सकते हैं भारत में इस समय हजारों ग्रेजुएट यूनिवर्सिटी पास करते हैं मगर अपनी इच्छा अनुसार नहीं सुन पाते वह दूसरे सक्सेसफुल लोगों को देख कर अपना रास्ता चुनते हैं मगर क्या वह किस किसम के लिए बने हैं कि नहीं वह प्रोफाइल से पता चल जाता है।

डॉ. गगन स्याल, बल्लभगढ़ में पैदा हुए और अपनी इच्छा अनुसार जर्मनी में फ्री स्टडी और जर्मन कोर्स से आकर्षित होते हुए जर्मनी में अपनी मास्टर और पीएचडी की डिग्री हासिल की। डॉ. गगन स्याल और उनके परिवार को कभी विश्वास नहीं हुआ था कि जर्मनी जैसे देश में एजुकेशन फ्री हो सकती है। 10 साल जर्मनी में रहकर जर्मन ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में काम किया और भारत वापस आ गए जर्मनी के माध्यम से बच्चों को मोटिवेट कर रहे हैं जो अपना यूज़ करने में कंफ्यूज है।

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