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करनाल की परियोजना अधिकारी पर लगाया जुर्माना
लंबित प्रकरणों पर आयोग का रुख सख्त
चंडीगढ़, 09 सितंबर -- हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग ने करनाल जिले से संबंधित एक शिकायत पर निर्णय सुनाया। शिकायत में कहा गया था कि महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी, निसिंग ने आवेदन को संसाधित करने और जिला कार्यक्रम अधिकारी को अग्रेषित करने में अनुचित विलंब किया। इस कारण निर्धारित समयसीमा के भीतर शिकायतकर्ता को लाभ उपलब्ध नहीं कराया गया। प्रकरण को अंतिम तिथि तक निपटाने के बजाय, फाइल को देरी से जिला कार्यक्रम अधिकारी को भेजा गया।
आयोग के प्रवक्ता ने बताया कि तथ्यों की समीक्षा के बाद आयोग ने निर्णय दिया कि इस विलंब के लिए महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी, निसिंग (जिला करनाल) जिम्मेदार हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि जिला कार्यक्रम अधिकारी, करनाल पर इस देरी की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती।
अधिकारी द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण अस्वीकार्य मानते हुए, आयोग ने महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी, निसिंग को दोषी ठहराया और उन पर एक हजार रुपये का सांकेतिक दंड लगाया है। यह राशि उनके वेतन से काटकर राज्य कोष में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही, आयोग ने जिला कार्यक्रम अधिकारी, करनाल को निर्देशित किया है कि जिले में लंबित सभी मामलों का निस्तारण बिना किसी और विलंब के सुनिश्चित किया जाए। इस संबंध में प्रमाण पत्र 6 अक्टूबर 2025 तक आयोग को भेजा जाए कि 30 जून 2025 से पूर्व दायर कोई भी प्रकरण विभाग में लंबित नहीं है।
साथ ही संबंधित अधिकारी यह भी सुनिश्चित करें कि प्रत्येक आवेदन की स्थिति सरल पोर्टल पर वास्तविक समय (रियल टाइम) में अद्यतन की जाए, ताकि आवेदक अपने मामलों की प्रगति को देख सकें और अपीलीय प्राधिकरणों के समक्ष अनावश्यक अपीलें न हों। आयोग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि जिला स्तर पर लंबित मामलों की समीक्षा हेतु पर्याप्त आंतरिक निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए और अधिकारियों को आरटीएस मानकों के पालन के प्रति उत्तरदायी बनाया जाए।