ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद भारत और अमेरिका के बीच पहली अहम वार्ता

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New Delhi News : डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के 8 महीने बाद भारत और अमरीका के रक्षा मंत्रियों की यहां 26 सितम्बर को पहली अहम वार्ता होगी। इस बातचीत के दौरान भारत में विदेशी हथियार बनाने के लिए मेक इन इंडिया और इसके तहत सामरिक साझेदारी की नीतियों को लेकर अमरीकी कंपनियों द्वारा जाहिर चिंताओं का मसला अमरीकी पक्ष द्वारा उठाया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि गत एक दशक के दौरान भारत ने अमरीकी कंपनियों से 15 अरब डालर से अधिक के हथियार खरीदे हैं। अब मोदी सरकार ने विदेशों में बने हथियारों को सीधे खरीदने के बदले भारत में मेक इन इंडिया और सामरिक साझेदारी की नीति के तहत बनाने की नीति जारी की है। इसके तहत विदेशी रक्षा कंपनियों से कहा गया है कि भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी से संयुक्त उद्यम स्थापित करें और भारतीय हथियार सौदों की होड़ में भाग लें।लेकिन सामरिक साझेदारी(एसपी)की नीति में विदेशी कंपनी को 49 प्रतिशत हिस्सेदारी की अनुमति देने और तकनीक हस्तांतरण करने की शर्त रखी गई है जिससे विदेशी कंपनियों को लग रहा है कि भारत में रक्षा क्षेत्र में निवेश करना उनके लिए समस्याओं भरा होगा।

उल्लेखनीय है कि अमरीकी कंपनी लाकहीड मार्टिन ने भारतीय वायुसेना को अपना एफ-16 विमान भारत में ही बना कर बेचने की पेशकश की है लेकिन रक्षा मंत्रालय की सामरिक साझेदारी(एसपी) को लेकर उसने कई शंकाएं जाहिर की हैं। इसके अलावा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अमरीका फर्स्ट नीति और प्रधानमंत्री मोदी की मेक इन इंडिया नीति में टकराव पैदा होने की सम्भावना है जिसे अमरीकी कंपनियां नजरअंदाज नहीं कर सकतीं।

ओबामा प्रशासन के कार्यकाल में भारत अमरीका रक्षा रिश्ते नई ऊंचाई पर पहुंचे थे। दोनों देशों ने भारत में उच्च कोटि के रक्षा साजसामान के साझा उत्पादन के लिए डिफेंस ट्रेड एंड टेकनालाजी समझौता(डीटीटीआई) किया था जिसकी बैठक नए प्रशासन के तहत नहीं हुई है।अमरीका ने पिछले साल ही भारत को अपना मेजर डिफेंस पार्टनर घोषित किया था जिसके तहत अमरीका ने भारत से वादा किया था कि वह भारत के साथ उन देशों के समकक्ष बर्ताव करेगा जैसा वह अपने सबसे नजदीकी साझेदार देशों के साथ लेनदेन करता है।

इसके तहत अमरीका ने सभी तरह की उन संवेदनशील तकनीक भारत के साथ साझा करने का वादा किया था लेकिन अब नए ट्रंप प्रशासन में मेजर डिफेंस पार्टनर के तहत सहयोग की कोई नई पहल नहीं की गई है। इसी पृष्ठभूमि में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और गहरा करने और इसमें पैदा नीतिगत अड़चनों को दूर करने के बारे में दोनों पक्षों के बीच पहली गहन बातचीत होगी।

यहां रक्षा सूत्रों ने बताया कि अमरीकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस यहां विशेष विमान से 25 सितम्बर को पहुंचेंगे। रक्षा मंत्री की हैसियत से निर्मला सीतारमण की यह पहली महत्वपूर्ण बैठक होगी। दोनों रक्षा मंत्री 26 सितम्बर को मुलाकात करेंगे और आपसी रक्षा सहयोग को गहरा करने के हर मसले पर विस्तार से बातचीत करेंगे।अमरीकी रक्षा मंत्री के साथ एक उच्चस्तरीय रक्षा शिष्टमंडल भारत आ रहा है।

इस बातचीत में हिंद महासागर और हिंद प्रशांत इलाके में समुद्री सुरक्षा सहयोग को गहरा करने और बेहतर तालमेल बैठाने के इरादे से भी बातचीत होगी। दोनों महासागरों में चीन की विस्तारवादी और प्रभुत्ववादी नीतियां भारत और अमरीका को परेशान कर रही हैं। इसके मद्देनजर दोनों देशों के बीच आपसी समुद्री सहयोग को बढ़ाने के बारे में भी बातचीत होगी। जेम्स मैटिस राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे।

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