शिव नादर स्कूल में एनिमल फार्म ‘‘ शिक्षण को कक्षा से ले जाने की पहल’’

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Faridabad News : शिव नादर स्कूल, फरीदाबाद (शिव नादर फाउंडेशन की गैर-लाभकारी पहल) ने अपने प्रीप्राइमरी और प्राइमरी छात्रों के लिए आज स्कूल परिसर में द्वितीय एनिमल फार्म आयोजन किया। अपने छात्रों के लिए प्रयोगात्मक शिक्षा तथा कक्षा से परे जाकर शिक्षण अवसर प्रदान करने के अपने उद्देष्य के तहत आयोजित एनीमल फार्म का छात्रों, अभिभावकों एवं शिक्षकों ने पिछले साल की इसकी शुरआत की तरह ही इसका स्वागत किया और जमकर लुत्फ उठाया।

यह आयोजन ईवीएस पाठ्यक्रम के तहत किया गया। इस आयोजन के दौरान छात्र विभिन्न प्रकार के जानवरों, उनकी विशेषताओं और उनके महत्व का अध्ययन करते हैं। इस आयोजन के लिए विभिन्न घरेलू जानवरों को एक साथ लाया जाता है। छात्र जानवरों को गहराई से निरीक्षण करते हैं और उनके बारे में सीखते हैं। ये बच्चे अपने स्कूल में घोड़े, बकरी, भैंस, गाय, गदहे, सुअर, मुर्गा देखने के रोमांच हासिल करते हैैं। एनीमल फार्म के जरिए बच्चों के बीच इन जानवरों को लेकर बातचीत षुरू करने के मौके मिलते हैं। इससे बच्चों को सिखाने की प्रक्रिया अधिक प्रासंगिक एवं वास्तविक हो जाती है। आज के इस आयोजन का एक खास पहलू उन अभिभावकों की ओर से प्रदर्षित किया जाने वाला सहयोग था जो अपने पालतू जानवरों को यहां लेकर आए थे ताकि बच्चे फार्म और पालतू जानवरों में अंतर कर सकें।

 

विद्यार्थियों के लिए इस अनूठे अनुभवात्मक आयोजन के बारे में शिव नादर स्कूल, फरीदाबाद की प्रिंसिपल अंजू वाल ने कहा, ‘‘पशु हमारी पारिस्थितिकी तंत्र का एक आंतरिक हिस्सा हैं, और हमारा प्रयास है कि छात्र जानवरों के बारे में अधिक जानकारी हासिल कर सकें और जानवरों के साथ उन्हें अधिक सहज और अनुकूल बनाया जाए। ऐसे आयोजन से न केवल छात्रों को बल्कि वयस्कों को भी पर्यावरण के विभिन्न पहलुओं के बारे में अंतर्दृष्टि मिलती है।

बच्चों के माता-पिता और अभिभावकों ने भी अपने पालतू जानवरों के बारे में कई उत्सुक छात्रों से बात करके खूब आनंद उठाया। अंजु वाल कहती हैं, ‘‘शिक्षकों ने बच्चों को जानवरों को देखने के दौरान अनेक तरह के सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित किया, जैसे जानवर क्या खाते हैं? उनके पंजे या खुर क्यों होते हैं? क्या उनके दांत कुंद या तीखे होते हैं? वे किस प्रकार की आवाज निकालते हैं? यह देखकर बहुत आनंद आया कि छात्र एक दूसरे के साथ चर्चा कर रहे थे और लगभग सही-सही उत्तर बता रहे थे। बच्चों की चर्चा में षिक्षकों ने मार्गदर्षन देने वाले गाइड के रूप में काम किया।

यह देखना भी काफी आनंदित करने वाला था कि किस तरह से मासूम बच्चों और जानवरों के बीच प्यार पैदा हो जाता है।

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