अपना ब्लड प्रेशर नंबर जानें, ताकि हाइपरटेंशन से बचाव या इस पर नियंत्रण रखना हो मुमकिन : डॉ गर्ग

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Sirsa News, 26 June 2019 : हाइ ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) या हाइपरटेंशन को ’साइलेंट किलर‘ कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण दिखायी नहीं देते लेकिन इसकी वजह से कार्डियोवास्क्युलर रोग या अन्य जटिलताएं पैदा हो सकती हैं, और यहां तक कि मृत्यु भी हो सकती है।

ब्लडप्रेशर की जांच आसानी से डॉक्टर से करायी जा सकती है और हाइपरटेंशन का पता चलते ही आपके डॉक्टर आवष्यक इलाज तथा इसे नियंत्रित रखने के लिए जीवनशैली में बदलाव के बारे में आपको जानकारी दे सकते हैं।

इस बारे में डॉ मंदीप गर्ग, डीएम कार्डियोलॉजिस्ट ने कहा, ’’हाइपरटेंशन के अक्सर कोई शुरूआती लक्षण या अन्य किसी प्रकार के चिह्न दिखायी नहीं देते हैं जिसकी वजह से मरीज़ों को अक्सर यह पता नहीं चल पाता कि वे इस विकार से पीडि़त हैं। लेकिन यदि हाइपरटेंशन का निदान नहीं होता और इसका प्रबंधन नहीं किया जाए तो यह स्ट्रोक, कन्जेस्टिव हार्ट फेलियर एवं किडनी फेल होने का कारण बन सकता है। मैं 35 साल से अधिक उम्र के हर व्यक्ति को नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराने की सलाह देती हूं, ताकि वे हाइपरटेंशन पर नियंत्रण रख सकें या इससे बचाव कर सकें।‘‘ डॉ गर्ग ने हाल के एक अध्ययन का हवाला दिया जिसके मुताबिक हरियाणा में 15 से 49 साल की आयुवर्ग के 31.3 प्रतिशत वयस्क हाइपरटेंशन से पीडि़त हैं।‘‘

ब्लड प्रेशर का मतलब होता है रक्त वाहिकाओं में बहने वाले रक्त द्वारा वाहिकाअें की दीवारों पर डाला जाने वाला दबाव। हाइ ब्लड प्रेशर हरियाणा में मृत्यु और विकलांगता का चौथा सबसे प्रमुख जोखिक कारक है जबकि भारत में यह स्वास्थ्य संबंधी नुकसान पैदा करने वाला चौथा सबसे प्रमुख कारण है डॉक्टरों की सलाह है कि 18 साल के युवा को भी अपने ब्लड प्रेशर की नियमित जांच हर दो साल में कम से कम एक बार अवश्य करानी चाहिए और 40 साल की उम्र के बाद हर साल कम से कम एक बार ब्लड प्रेशर की नियमित जांच करायी जानी चाहिए।

ब्लड प्रेशर किस कारण से होता है, इसकी जानकारी नहीं है और यही सबसे बड़ा खतरे का कारण भी है। उम्र, जीवनशैली, पारिवारिक इतिहास, तनाव वगैरह से हाइ ब्लड प्रेशर हो सकता है। अगर यह प्रेशर लंबे समय तक बना रहता है तो इसकी वजह से रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है और हृदय पर भी दबाव बढ़ता है। इसके परिणामस्वरूप हार्ट फेल, हार्ट अटैक और किडनी तथा आंखों की तकलीफें बढ़ सकती हैं।

ब्लड प्रेशर का पता लगने पर अपने डॉक्टर की सलाह का अवश्य पालन करें ताकि आपका ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहे और इसकी वजह से पैदा होने वाली जटिलताओं की रफ्तार भी धीमी की जा सके। इसके लिए जरूरी है संतुलित खुराक लेना जिसमें फलों, सब्जियों और साबुत अनाज की मात्रा अच्छी होनी चाहिए, नमक का सेवन घटाएं, हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट की सामान्य एरोबिक गतिविधि अवश्य करें, तनाव कम करें, वजऩ सामान्य रखें, शराब और तंबाकू सेवन में कमी लाएं तथा डॉक्टर के निर्देशानुसार दवाएं लेते रहें।

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